Baheliya Poacher Gang: वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता हासिल करते हुए वन विभाग ने बाघों का शिकार करने वाले बहेलिया गिरोह के सरगना अजीत पारधी समेत छह लोगों को राजुरा तहसील के चुनाला से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वन विभाग की विशेष टीम ने की, जिससे बाघों के अवैध शिकार और उनके अंगों के अवैध व्यापार के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है। हालांकि, इस घटना ने वन विभाग की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अजीत पारधी अपने पूरे परिवार के साथ पिछले 6 महीने से इसी क्षेत्र में रह रहा था और वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
कैसे करते थे शिकार?
गिरोह के काम करने का तरीका सुनियोजित और संगठित था। शिकारी अपने परिवारों के साथ जंगल के आसपास रहते थे और पूरे जंगल की रेकी (निगरानी) करते थे। वे बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखते और सही मौका देखकर उनका शिकार कर लेते थे। इसके बाद बाघ के अंगों की तस्करी कर उन्हें अवैध बाजार में बेच दिया जाता था।
अवैध व्यापार का बड़ा नेटवर्क
गिरोह केवल शिकार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उनका एक व्यापक नेटवर्क था जो अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक फैला हुआ था। शिकार के बाद वे अपने संपर्कों के जरिए बाघ के नाखून, खाल, हड्डियां और अन्य अंगों को उन लोगों तक पहुंचाते थे जो पहले से इस कारोबार में शामिल थे।
वन विभाग
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुख्यात शिकारी अजीत पारधी 6 महीने से चुनाला में रह रहा था, लेकिन वन विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इससे यह साफ होता है कि वन विभाग की सतर्कता में भारी चूक हुई है।
हालांकि, यह मामला तब उजागर हुआ जब वन विभाग को संयोगवश कुछ जानकारी मिली और तत्काल कार्रवाई करते हुए गिरोह को गिरफ्तार किया गया। लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर संयोग से यह जानकारी न मिलती, तो क्या यह गिरोह अभी भी सक्रिय रहता?
अब आगे क्या?
वन विभाग ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। इस बात की भी जांच होगी कि क्या इस पूरे नेटवर्क में वन विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता थी? साथ ही, आगे इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
यह मामला दर्शाता है कि बाघ संरक्षण को लेकर अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। शिकारियों के नेटवर्क मजबूत हो रहे हैं और वे प्रशासन की नाक के नीचे अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। इस घटना के बाद वन विभाग की सतर्कता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। जरूरत इस बात की है कि निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाया जाए और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अधिक सख्त कदम उठाए जाएं।
