एपीआई योगेश पाटिल: गढ़चिरौली के नारकसा मुठभेड़ में निर्णायक नेतृत्व, दो खूंखार नक्सलियों का सफाया, राष्ट्रपति के शौर्य पदक से हुए सम्मानित
महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के दुर्गम जंगलों में नक्सलवाद के विरुद्ध साहसिक अभियानों का नेतृत्व करने वाले सहायक पुलिस निरीक्षक (API) योगेश देवराम पाटिल (API) योगेश देवराम पाटिल को राष्ट्रपति शौर्य पदक (Police Medal for Gallantry – PMG) से अलंकृत किया गया। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें यह सम्मान मुंबई के राजभवन में आयोजित भव्य समारोह में गुरुवार 26 जून 2025 को प्रदान किया।
2019 की नारकसा मुठभेड़ बनी वीरता का प्रतीक
यह अलंकरण 15 सितंबर 2019 को गढ़चिरौली के नारकसा जंगल क्षेत्र में हुई एक भीषण मुठभेड़ में पाटिल की निर्णायक भूमिका के लिए दिया गया है। उस दिन सी-60 कमांडो पथक का नेतृत्व करते हुए उन्होंने दो कुख्यात व वांछित नक्सलियों को ढेर किया। भीषण गोलीबारी के बीच उन्होंने न केवल ऑपरेशन को सफलता की ओर मोड़ा, बल्कि अपने पूरे दल की सुरक्षा और मनोबल भी बनाए रखा।
उनकी रणनीति, सतर्कता और साहस ने उस ऑपरेशन को केवल एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक मिसाल बना दिया – एक ऐसा अभियान, जिसने नक्सल संगठन की रीढ़ को झकझोर दिया।
भारत सरकार ने मान्यता दी असाधारण बहादुरी को
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 15 अगस्त 2021 को पाटिल के नाम की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया था कि उनका कार्य आंतरिक सुरक्षा व कानून-व्यवस्था की रक्षा में असाधारण साहस का प्रतीक है। यह निर्णय उन तमाम अनाम और अनदेखे पुलिसकर्मियों के परिश्रम और बलिदान को भी उजागर करता है, जो प्रतिदिन जंगलों में दुश्मनों से दो-चार होते हैं।
एक नायक का अब तक का सफर
एपीआई पाटिल की सेवा यात्रा साहस, समर्पण और उत्कृष्टता की कहानी है। वर्ष 2021 में तेज पदोन्नति के साथ उन्हें पुलिस उपनिरीक्षक से सहायक पुलिस निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया था। उनके नाम पहले से ही विशेष व कठिन सेवा पदक, आंतरिक सुरक्षा पदक, और पुलिस महासंचालक पदक जैसे कई सम्मान दर्ज हैं।
वर्तमान में घुग्घुस थाने में सेवाएं, अनुशासन और नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध
इस समय पाटिल चंद्रपुर जिले के घुग्घुस पुलिस थाना में पदस्थ हैं, जहाँ वे अपने अनुशासन, नेतृत्व कौशल और सजग कार्यशैली के लिए व्यापक रूप से प्रशंसित हैं। क्षेत्रीय अपराध नियंत्रण, खनिज तस्करी पर रोकथाम और सामुदायिक पुलिसिंग में उनकी भागीदारी उल्लेखनीय रही है।
प्रेरणा बना सम्मान, विभाग का बढ़ा मनोबल
इस पदक के मिलने से केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरा राज्य पुलिस बल गौरवान्वित हुआ है। यह सम्मान उन अनगिनत पुलिसकर्मियों की निस्वार्थ सेवा को मान्यता देता है, जो रोज़ अपनी जान हथेली पर रखकर देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं।
युवाओं के लिए एपीआई पाटिल एक प्रेरक आदर्श बनकर उभरे हैं – यह दिखाता है कि साहस, निष्ठा और विवेक से नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का सफलता से सामना किया जा सकता है।
गढ़चिरौली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रत्येक ऑपरेशन जान जोखिम में डालने जैसा होता है। ऐसे में एपीआई योगेश पाटिल का सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राज्य पुलिस बल के सामूहिक हौसले की जीत है।
यह पदक एक प्रेरक दृष्टांत बनकर भावी अभियानों की दिशा और रणनीति को मजबूती देगा। नक्सल उन्मूलन जैसे दीर्घकालिक अभियानों में ऐसे नेतृत्वकारी योद्धा ही असली परिवर्तनकर्ता होते हैं।
