तीन साल से अधूरा फ्लाईओवर, दिनभर बंद रहता रेलवे गेट, स्कूल के बच्चे, मरीज और आम नागरिक रोज हो रहे हैं परेशान – महिलाएं और विद्यार्थियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
Ghugus G39Railway Gate | शुक्रवार की दोपहर को घुग्घूस में उस समय जनाक्रोश भड़क उठा जब स्थानीय महिलाओं ने रेलवे गेट और अधूरे पुल निर्माण को लेकर वेकोलि (WCL) कार्यालय पर मोर्चा निकाला। G-39 रेलवे गेट की बार-बार और लम्बे समय तक की जाने वाली बंदी, और पिछले 3 वर्षों से निर्माणाधीन रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज में हो रही देरी ने नागरिकों का धैर्य तोड़ दिया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस समस्या के चलते बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की चिकित्सा, महिलाओं की सुरक्षा और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लगातार ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और समय की बर्बादी ने इस क्षेत्र को त्रस्त कर रखा है। स्थानीय प्रशासन, रेलवे और वेकोलि पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 1 अगस्त 2025 तक समाधान नहीं मिला, तो राजीव रतन हॉस्पिटल के समीप रेलवे गेट पर चक्का जाम किया जाएगा।
परेशानी की जड़:
- G-39 रेलवे गेट दिनभर कई बार बंद रहता है, जिससे एम्बुलेंस, स्कूल बसें, और जरूरी सेवाएं ठप हो जाती हैं।
- पिछले 3-4 वर्षों से नया रेलवे पुल अधूरा पड़ा है, जिससे यातायात का पूरा दबाव पुराने रेलवे गेट पर है।
- नागरिकों की मांग है कि पुल निर्माण में देरी रोककर तुरंत काम पूरा कराया जाए।
नागरिकों की प्रमुख मांगें:
- रेलवे पुल का निर्माण कार्य तत्काल पूरा हो।
- सुभाष नगर और म्हातारदेवी रोड का सुधार हो।
- रेलवे गेट की टाइमिंग सार्वजनिक की जाए।
- WCL साइडिंग पर लोडिंग का कार्य समयबद्ध हो।
- वैकल्पिक मार्ग तुरंत खोला जाए।
- 24×7 ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो।
प्रशासन को दी चेतावनी:
यदि समय रहते समस्या का हल नहीं किया गया, तो यह आंदोलन एक बड़े जनांदोलन में बदल सकता है। नागरिकों ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया है कि 1 अगस्त को प्रस्तावित चक्का जाम के दौरान शांति बनाए रखने में पुलिस प्रशासन सहयोग करे।
घुग्घूस रेलवे गेट की समस्या महज एक ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक अनदेखी का प्रतीक बन चुकी है। यह संघर्ष अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है, और यदि शासन-प्रशासन समय रहते न जागा, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
