दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में हुई वोट चोरी की तरह ही महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के राजुरा विधानसभा क्षेत्र में भी वोटरों के नाम जोड़ने और हटाने का बड़ा खेल खेला गया।
राहुल गांधी ने बताया कि राजुरा में 6,853 मतदाता पहले मतदार सूची में जोड़े गए, और जब कांग्रेस नेताओं ने शिकायत की तो उतने ही नाम तुरंत डिलीट कर दिए गए। उन्होंने इसे “ऐड-एंड-डिलीट गेम” बताते हुए भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत पर सवाल उठाया।
2024 चुनावों से चर्चा में मामला
राजुरा विधानसभा सीट पर यह विवाद 2024 के विधानसभा चुनाव से ही चर्चा में है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक सुभाष धोटे लगातार इस मामले का पीछा कर रहे हैं। धोटे का आरोप है कि जिले का प्रशासन और पुलिस इस मामले में टालमटोल कर रहे हैं।
उन्होंने शिकायत की है कि 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2024 के बीच ऑनलाइन माध्यम से 11,667 बोगस वोटरों का रजिस्ट्रेशन किया गया था। शिकायत के बाद 6,853 नाम डिलीट किए गए लेकिन अब तक जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एफआईआर दर्ज, आरोपी गायब
इस मामले में राजुरा पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है, लेकिन 11 महीने बाद भी पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंची है। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस जानबूझकर IP एड्रेस, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर जैसी अहम जानकारी साझा नहीं कर रही ताकि असली “वोट चोर” का खुलासा न हो।
भाजपा प्रत्याशी पर भी आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राजुरा से भाजपा प्रत्याशी के पास से 61 लाख रुपये और चुनावी सामग्री जब्त की गई थी। गडचांदूर पुलिस स्टेशन में इसका मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।
कांग्रेस की चेतावनी – “अब अदालत की लड़ाई”
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे ने चेतावनी दी है कि यदि एक महीने में कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता की अदालत में तो लड़ाई लड़ ही रही है, अब न्यायालय में भी यह लड़ाई लड़ी जाएगी।
यह पूरा मामला राजुरा के राजनीतिक माहौल को गरमा रहा है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप और पुलिस प्रशासन की चुप्पी विपक्ष को बड़ा मुद्दा देने का काम कर रही है। आने वाले चुनावों में यह मामला भाजपा के लिए सिरदर्द बन सकता है।
