जनादेश स्पष्ट, लेकिन सत्ता के भीतर चला गुटों का खेल — अंततः पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के हस्तक्षेप से थमी बगावत
घुग्घुस नगरपरिषद के हालिया चुनाव में शहर की जनता ने स्पष्ट जनादेश देते हुए कांग्रेस को नगराध्यक्ष पद सहित 11 प्रभागों के 22 नगरसेवकों में से 11 नगरसेवक चुनकर दिए। इसके साथ ही दो निर्दलीय नगरसेवकों का समर्थन मिलने से कांग्रेस ने नगरपरिषद में बहुमत हासिल कर लिया। यह जीत केवल संख्याबल की नहीं, बल्कि राजनीतिक संघर्ष, रणनीति और भीतरखाने की सियासत का भी परिणाम रही।
गुट नेता चयन और सियासी हलचल
चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस शहर अध्यक्ष राजू रेड्डी को पार्टी के 11 नगरसेवकों और दो निर्दलीय नगरसेवकों के समर्थन से गुट नेता चुना गया। यह चयन होते ही नगरपरिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गई। आरोप हैं कि गुट नेता बनते ही पार्टी के सांसद द्वारा कुछ निर्वाचित नगरसेवकों को विश्वास में लेकर विद्रोह की पटकथा रची गई। इसमें कांग्रेस के 6 नगरसेवकों और अन्य दलों के 2 नगरसेवकों को साथ लेकर खेल शुरू किया गया।
उपाध्यक्ष पद को लेकर खींचतान
इस सियासी चाल का केंद्र नगरपरिषद का उपाध्यक्ष पद रहा। आरोपों के मुताबिक, अन्य दल के पार्षद को उपाध्यक्ष बनाने के लिए दबाव डाला गया और यहां तक कहा गया कि यदि उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया तो बाकी नगरसेवकों को “उठा लिया जाएगा”। यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
वडेट्टीवार की भूमिका और नेतृत्व का हस्तक्षेप
उल्लेखनीय है कि घुग्घुस नगरपरिषद चुनाव में राज्य के विपक्ष नेता विजय वडेट्टीवार ने अपने नेतृत्व में शहर में विशेष ध्यान देते हुए कई सभाएं कीं और कांग्रेस को बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। जैसे ही विद्रोह की भनक लगी, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सभी कांग्रेस नगरसेवकों को सख्त संदेश दिया कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने या गुट तोड़ने की कोशिश पर कड़ी कार्रवाई होगी।
व्हिप और विद्रोहियों की बैचेनी
उपाध्यक्ष पद के लिए जब राजू रेड्डी का नाम सामने आया, तब ऐन वक्त पर सांसद द्वारा रोशन पचारे को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। बुधवार सुबह सांसद और जिलाध्यक्ष घुग्घुस पहुंचे और घंटों तक फोन पर नगरसेवकों को अपने खेमे के पक्ष में मतदान के लिए मनाने की कोशिश होती रही। लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव से एक दिन पहले ही कांग्रेस गुट नेता द्वारा व्हिप जारी कर दिया गया, जिससे संभावित विद्रोहियों की रणनीति धराशायी हो गई।
निर्दलीयों का समर्थन और जनविश्वास
नवनिर्वाचित निर्दलीय नगरसेवक माला मेश्राम और पंकज धोटे ने एकमत होकर कांग्रेस को समर्थन दिया। इससे कांग्रेस का बहुमत और मजबूत हुआ और शहर की जनता के बीच यह संदेश गया कि स्थिरता और विकास के लिए स्पष्ट समर्थन मौजूद है।
अंततः कांग्रेस की जीत
बुधवार को विजय वडेट्टीवार स्वयं घुग्घुस पहुंचे। उन्होंने नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष राजू रेड्डी के संघर्ष की सराहना की और नगराध्यक्ष दीप्ति सोनटक्के को भी आशीर्वाद दिया। और नाम ‘रोशन’ है तो, अंधेरा पसारने का काम न कर एसी हिदायत पचारे को दी।
वही एक सप्ताह से जारी राजनीतिक उठापटक पर आखिरकार विराम लगा। कांग्रेस ने अपने बहुमत के साथ नगरपरिषद पर मजबूती से कब्जा जमाया और भाजपा विपक्ष की भूमिका में सिमट गई।
रैली और जनउत्साह
निर्वाचन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगराध्यक्ष और नगरसेवकों के साथ शहर कार्यालय से नगरपरिषद तक रैली निकाली। इस रैली में बड़ी संख्या में नागरिकों की भीड़ उमड़ी, जिसने यह साफ कर दिया कि तमाम अंदरूनी खींचतान के बावजूद जनता का भरोसा कांग्रेस के साथ बना हुआ है।
घुग्घुस नगरपरिषद की राजनीति ने यह दिखा दिया कि जनादेश जितना स्पष्ट हो, सत्ता की राह उतनी ही जटिल हो सकती है। लेकिन अंततः पार्टी अनुशासन, नेतृत्व की सख्ती और बहुमत की एकजुटता ने कांग्रेस को मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। अब चुनौती है—इस भरोसे को विकास और सुशासन में बदलने की।
