शनिवार, 20 दिसंबर को घुग्घुस नगरपरिषद का ऐतिहासिक पहला चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। नगराध्यक्ष पद के लिए 6 और 11 प्रभागों के 22 नगरसेवक पदों के लिए कुल 112 प्रत्याशी मैदान में थे।
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लाइनें दिखाई दीं, लेकिन अपेक्षा के अनुसार मतदान टक्का अधिक नहीं बढ़ पाया। कुल 36 मतदान केंद्रों पर लगभग 52 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
घुग्घुस नगरपरिषद के इस पहले चुनाव में कुल 32,488 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से लगभग आधे मतदाताओं ने ही मतदान किया। राजनीतिक दलों – कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, एनसीपी, बसपा और स्वतंत्र उम्मीदवारों – सभी ने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुँचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने निजी वाहनों से लोगों को केंद्र तक पहुँचाने की व्यवस्था की, लेकिन बावजूद इसके मतदान का प्रतिशत उम्मीद से कम रहा।
EVM में बंद किस्मत, अब सबकी निगाहें रविवार पर:
मतदान संपन्न होने के साथ ही सभी 112 उम्मीदवारों की किस्मत अब EVM में कैद हो चुकी है।
रविवार, 21 दिसंबर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे। नगराध्यक्ष पद के साथ ही 11 प्रभागों के विजेताओं की तस्वीर भी साफ हो जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कम मतदान प्रतिशत कुछ उम्मीदवारों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, खासकर उन वार्डों में जहाँ जातीय और समुदाय आधारित गणित प्रमुख भूमिका निभाता है।
मतदान केंद्र पर नये दूल्हा की एंट्री ने खींचा ध्यान:
इस चुनाव के बीच एक अनोखा और प्रेरणादायक दृश्य भी देखने को मिला। अक्षय चिमणे (रा. घुग्घुस) ने नागपुर में होने वाली अपनी शादी से पहले मतदान किया। अक्षय का विवाह 21 दिसंबर को नागपुर निवासी रेणुका वडस्कर से तय है।
सुबह बारात नागपुर रवाना होने से पहले उन्होंने मतदान केंद्र पहुंचकर अपना लोकतांत्रिक दायित्व निभाया। नया दूल्हा के रूप में आए अक्षय को देखकर मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
पहली बार नगरपरिषद बनने के बाद हुए इस चुनाव में स्थानीय राजनीति का तापमान चरम पर रहा।
हर प्रभाग में मतदाता समुदाय, पारिवारिक प्रभाव और गुटबाजी निर्णायक भूमिका निभाते दिखाई दिए।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रभाग 2, 3, 4, 6 और 9 में मुकाबला बेहद कांटे का है, जबकि नगराध्यक्ष पद के लिए दीप्ति सोनटक्के, शारदा दुर्गम और अन्य दावेदारों के बीच सीधा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।
घुग्घुस नगरपरिषद चुनाव ने पहली बार स्थानीय लोकतंत्र की दिशा में एक मजबूत कदम रखा है।
अब सबकी निगाहें रविवार सुबह से शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी हैं —
जहाँ तय होगा कि किसके सिर सजेगा नगराध्यक्ष का ताज और कौन बनेगा नगर का जनप्रतिनिधि।

