कांग्रेस पहुंच रही घर-घर, सभाओं में व्यस्त होने से पिछड़ रही भाजपा
चुनावी जंग अब निर्णायक मोड़ पर है। कांग्रेस को लीड करने वाले नेतृत्वकर्ता एवं घुग्घुस शहराध्यक्ष अपने 10 वर्षों की समाजसेवा, कार्य और राजनीतिक बिसात के चलते यहां के विरोधकों पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि एक ओर जहां भाजपा के शिर्ष नेताओं का रुझान बड़ी-बड़ी सभाओं पर फोकस हैं तो कांग्रेस ने अपनी रणनीति को बदलते हुए प्रत्येक प्रभाग के हर घर तक पहुंचकर वोटरों का मन जीतने की कोशिश कर रही है। वॉटरमैन के रूप में परिचित राजू रेड्डी ने बरसों से प्यासे नागरिकों को अपने खर्च से टैंकर लगाकर पेयजल आपूर्ति का काम किया है। अब उनके इस सामाजिक छवि के चलते विरोधकों को भी पसीना छूटने लगा है। बहुभाषी प्रभाग क्रमांक 3 में मराठी हो या हिंदी, तेलुगू हो या उत्तर भारतीय, हर बस्ती में जरूरतमंदों तक गंभीर पेयजल संकट में वॉटरमैन बनकर सेवा दे चुके रेड्डी अपने समाजकार्य के बल पर वोटरों का दिल जीतने में अपनी पूरी शक्ति झोंक रहे हैं।
घुग्घुस में जब कांग्रेस शून्य के बराबर थी, अंतिम सांसें गिन रही थी, तब एक वॉटरमैन बनकर उभरे राजू रेड्डी की इंट्री से यहां का राजनीतिक माहौल बदल गया। 80 % समाजकारण और 20 % राजकारण की नीति को रेड्डी ने आगे बढ़ाया। कांग्रेस की समूची टिम का नेतृत्व किया। उनकी कड़ी मेहनत से कांग्रेस घुग्घुस में अब मजबूत स्थिति में पहुंच पायी। अब वे पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। उनकी यह सीट प्रतिष्ठा की मानी जा रही है। सत्ता के गलियारों में इस सीट का काफी महत्व है। इसलिए भाजपा के दिग्गज नेताओं ने न केवल घुग्घुस में अनेक दिनों से डेरा डाल रखा है बल्कि मतदान के पूर्व संध्या पर भी बड़ी-बड़ी सभाओं का आयोजन वे करते नजर आएं। भाजपा की इस रणनीति का तोड़ निकालने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पूरी टीम रेड्डी के नेतृत्व में प्रत्येक प्रभाग के घर-घर तक पहुंचाने का बिड़ा उठा चुकी हैं। कांग्रेस का फोकस प्रत्यक्ष भेंट कर वोटरों से सीधे संपर्क करने का दिखाई पड़ रहा है।
चुनावी जंग के बीच भाजपा के बागी एवं UBT के प्रत्याशी महेश लट्ठा की सक्रियता से समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा प्रत्याशी सुचिता लुटे एवं साजन गोहने को पूर्व के ग्रापं के चुनावों का अनुभव हैं। लेकिन महेश लट्ठा की बगावत यहां भाजपा के लिए भारी पड़ सकती है। क्योंकि घुग्घुस शहर के जलसंकट की समस्या को भाजपा के नेताओं ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। इसका फायदा अब विरोधकों को मिल सकता है। प्रदूषण, बेरोजगारी, स्वच्छता, जल निकासी, स्वास्थ्य आदि मुद्दों पर भाजपा के नेता जहां मुखर होकर इन समस्याओं का समाधान कर नागरिकों को राहत दिलाने में कमजोर पड़ते नजर आएं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस द्वारा विविध उपक्रम चलाने, बारिश में गरीबों की छत को तिरपाल, कभी बिजली खंडित होने पर अधिकारियों का घेराव, कभी ओबीसी के हक में मोर्चा तो कभी रेलवे पुल के लिए कीचड़ में लेटकर आंदोलन किया। जरूरतमंदों को सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराने से लेकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए नि:शुल्क लकड़ियां उपलब्ध कराई। सड़क की गिट्टी भरवाने से लेकर जेल भरो आंदोलन ऐसे अनगिनत सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों ने राजू रेड्डी ने अपने नेतृत्व से लोहा मनवाया। लेकिन वे सर्वाधिक चर्चा में रहे वॉटरमैन के रूप में। क्योंकि हर प्यासी बस्ती के नागरिकों की गुहार के फोन कॉल्स राजू रेड्डी तक पहुंचते रहे और वे वॉटरमैन के रूप में मशहूर हो गए। 11 वर्षों का उनका संघर्ष अब कहीं जाकर प्रभाग 3 में उभरकर सामने आ रहा है।
प्रभाग 3 में कांग्रेस की आशा पाणघाटे की मौजूदगी भी भाजपा के अनुभवी समझे जाने वाले उम्मीदवार सुचिता लुटे एवं साजन गोहने के लिए अभेद्य दीवार की तरह है। भाजपा के लिए इस प्रभाग में महेश लट्ठा संकट का कारण बन सकते हैं। भाजपा ने लट्ठा को तवज्जो नहीं दिया। तब लट्ठा ने भाजपा से बगावत की और शिवसेना (UBT) से टिकट लेकर चुनावी मैदान में कूद पड़े। ऐसे में महेश लट्ठा के कारण कांग्रेस के बजाय भाजपा को अधिक क्षति पहुंचने की आशंका है।
प्रभाग 3 के चौक-चौराहों पर लोग अब उस व्यक्ति को पसंद करने की बात कर रहे हैं जो बरसों से उनका साथ देता आया है। यहां किसी भी प्रकार के भेद, जाति, धर्म, भाषा आदि के बंधनों से दूर साफ छवि वाले व्यक्ति को तवज्जो देने की चर्चा चल रही है। बहुभाषी इस प्रभाग में लोग बरसों से मिल-जुलकर रहते आये हैं। जनता की पहली पसंद यकीनन अच्छे कार्य करने वाले ही होंगे। केवल राजनीतिक दांव-पेच के बल पर यहां की जनता का दिल नहीं जीता जा सकता।
