घुग्घुस नगरपरिषद में उपाध्यक्ष पद के लिए 07 जनवरी 2026 (बुधवार) दोपहर 12 बजे होने वाले चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस ने अपने नगरसेवकों पर शिकंजा कसते हुए पार्टी व्हिप जारी कर दिया है। कांग्रेस के गुटनेता राजीरेड्डी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी नगरसेवक पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान करें।
14 सदस्यीय कांग्रेस गुट, दो अपक्ष भी शामिल
कांग्रेस गुट में कुल 14 नगरसेवक शामिल हैं। हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए दो अपक्ष नगरसेवकों पर भी यह व्हिप लागू रहेगा। पार्टी नेतृत्व ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि व्हिप का उल्लंघन करने वाले नगरसेवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता रद्द होने तक की नौबत आ सकती है।
“जनादेश से विश्वासघात न करें” – गुटनेता की अपील
गुटनेता राजीरेड्डी ने नगरसेवकों से अपील करते हुए कहा कि घुग्घुस की जनता ने भारी भरोसे के साथ कांग्रेस को बहुमत दिया है। ऐसे में जनादेश के साथ किसी भी प्रकार का समझौता अस्वीकार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी आदेश के खिलाफ जाना किसी के राजनीतिक भविष्य के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।
पिछले दिनों की सियासी उठापटक
पिछले कुछ दिनों से घुग्घुस नगरपरिषद में दबाव की राजनीति, पर्दे के पीछे की सौदेबाजी और फूट की आशंकाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस के पास नगराध्यक्ष पद और बहुमत होने के बावजूद उपाध्यक्ष पद को लेकर खींचतान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि कुछ प्रभावशाली ताकतें समीकरण बिगाड़ने की कोशिश में थीं, जिसके चलते कांग्रेस नेतृत्व को कड़ा कदम उठाते हुए व्हिप जारी करना पड़ा।
उपाध्यक्ष चुनाव बना शक्ति परीक्षण
आमतौर पर औपचारिक मानी जाने वाली उपाध्यक्ष पद की यह चुनावी प्रक्रिया अब शक्ति परीक्षण में बदल चुकी है।
• क्या कांग्रेस अपने नगरसेवकों को एकजुट रख पाएगी?
• क्या व्हिप से बगावत की आशंकाएं खत्म होंगी?
• या फिर घुग्घुस की राजनीति कोई नया मोड़ लेगी?
इन सवालों के जवाब कल दोपहर मतदान के बाद सामने आ जाएंगे।
स्पष्ट है कि घुग्घुस नगरपरिषद का यह चुनाव केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी अनुशासन, जनादेश और स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव बन चुका है।
