चंद्रपुर जिले की औद्योगिक नगर के रूप में मशहूर घुग्घुस शहर में नगर परिषद के चुनाव का बुखार अब परवान चढ़ा है। सर्वत्र चुनावी उम्मीदवार और राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा होने लगी है। खासकर नगराध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को लेकर यहां चर्चाओं का माहौल गरमाया गया है। वैसे तो सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार में हैं। कांग्रेस से दीप्ति सोनटक्के और भाजपा से शारदा दुर्गम चुनावी मैदान में जोर आजमाइश कर रही हैं। लेकिन अन्य प्रत्याशी रिता देशकर, नैना ढोके, आरती पाटिल एवं रंजीता आगदारी की मौजूदगी से राजनीतिक समीकरण बिगड़ भी सकते हैं। हालांकि इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है।
बीते ग्राम पंचायत के चुनाव हो या लोकसभा और विधानसभा के चुनाव, जिस तरह से घुग्घुस वासियों का रुझान कांग्रेस के प्रति अधिक सकारात्मक रहा है। इसके चलते जहां वर्ष 2015 में ग्रापं चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर अपना परचम लहराया था। वहीं गत लोकसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार रहे प्रतीभा धानोरकर को बड़ी संख्या में घुग्घुस से बढ़त दिलाई गई थी। वहीं विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी रहे प्रवीण पड़वेकर को भी घुग्घुस से बढ़त दिलाई गई थी। हालांकि वे यह चुनाव हार गए थे, लेकिन घुग्घुस वासियों का रुझान बीते कुछ वर्षों में कांग्रेस के प्रति दमदार रहा है। इसलिए यहां कांग्रेस के लिए राह आसान नजर आती है। भाजपा भले ही बीते चुनावों में पिछड़ गई हो, लेकिन संगठनात्मक रूप से विधायक किशोर जोरगेवार के नेतृत्व में इसे नई ऊर्जा मिली है। क्योंकि भाजपा के नवनियुक्त शहराध्यक्ष संजय तिवारी के कंधों पर घुग्घुस की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद से यहां के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इसलिए भाजपा को कम आंकना गलत साबित हो सकता है।
कांग्रेस पार्टी से नगराध्यक्ष का टिकट पाने में नाकाम हुई रंजीता आगदारी ने निर्दलीय पर्चा भरकर इस चुनावी संग्राम में गणित बिगाड़ने को आमदा है। जबकि कांग्रेस से उम्मीदवार पाने वाले रंजीता के पति पवन आगदारी प्रभाग क्रमांक 11 के लिए स्वयं लड़ रहे हैं। ऐसे में पति का कांग्रेस से चुनाव लड़ना और पत्नी की बगावत को लेकर अनेक सवाल उठे। इन सवालों के बीच कांग्रेस पार्टी ने रंजीता को कांग्रेस से 6 साल के लिए निलंबित कर दिया है। रंजीता की इंट्री से कांग्रेस को कितना असर होगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन अन्य प्रत्याशियों की सक्रियता कांग्रेस-भाजपा के वोट काटने में कितने निर्णायक होंगे, यह तय कर पाना फिलहाल मुश्किल है।
यहां बता दें कि नगराध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी शारदा दुर्गम ग्रापं की पूर्व सदस्य रही है। 2 बार उन्होंने भाजपा का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें एक दशक का अनुभव है। 12वीं उत्तीर्ण शैक्षणिक योग्यता, लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी पकड़ उनकी शक्ति है। वहीं नगराध्यक्ष पद की कांग्रेस प्रत्याशी दीप्ति सोनटक्के के लिए यह उनका पहला चुनावी संग्राम है। ग्रापं के पूर्व सदस्य देवराव सोनटक्के गुरुजी की वे बहू हैं। पिछले कुछ वर्षों से सामाजिक और राजनीति गतिविधियों में उनकी सक्रियता ने नेतृत्व के काबिल बना दिया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता B.A. है और पारिवारिक विरासत में मिले राजनीति पाठ के बल पर तथा वर्तमान सामाजिक सक्रियता के कारण उनकी मजबूत पकड़ दिखाई दे रही है।
घुग्घुस में नगराध्यक्ष पद के अलावा 11 प्रभागों के कुल 22 सीटों पर चुनाव जंग शुरू है। इस जंग में यदि कोई निर्णायक भूमिका अदा कर रहा है तो वह यहां के सुजान 32,545 मतदाता हैं। इन मतदाताओं के वोट ही अब घुग्घुस के प्रथम नगर परिषद की सत्ता का फैसला करेंगे।
