तेलंगाना सीमा से सटे महाराष्ट्र के विरूर स्टेशन क्षेत्र में सड़क की बदहाली से त्रस्त जनता
चंद्रपुर जिले के 🔍राजुरा तहसील के सुदूरवर्ती विरूर स्टेशन क्षेत्र के लोगों का धैर्य आखिरकार जवाब दे चुका है। यहां के बदहाल सड़क मार्ग की वजह से 30 हजार से अधिक ग्रामीणों का जीवन नारकीय हो चुका है। सड़क की खस्ताहाल स्थिति इतनी दयनीय है कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि 🔍सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क! अब, वर्षों से प्रशासन की अनदेखी झेल रहे ग्रामीणों ने आज गुरुवार 3 अप्रैल को विरुर क्षेत्र विकास समिति द्वारा विशाल धरण और चक्काजाम आंदोलन किया गया है।
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विकास से कोसों दूर विरूर क्षेत्र, खस्ताहाल सड़क बनी जानलेवा
तेलंगाना सीमा से सटे इस दुर्गम क्षेत्र में 22 से अधिक गांव आते हैं, जिनमें विरूर, सुबई, डोंगरगांव, भेंडाळा, टेंभुरवाही, चिंचोली, अंतरगांव आदि प्रमुख हैं। यह इलाका न केवल महाराष्ट्र बल्कि तेलंगाना से भी जुड़ता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं से अब भी महरूम है। यहां का प्रमुख मार्ग वरुर- विरूर- चिंचोली- अंतरगांव- अमृतगुडा तक जाता है, जिसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर है। इस सड़क के जरिये लोग तेलंगाना के सिरपुर शहर तक आवाजाही करते हैं। बावजूद इसके, इस सड़क की दशा दशकों से बेहद जर्जर बनी हुई है। यहां तक कि वाहन चालकों को अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ता है। आए दिन होने वाले सड़क हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर भी भारी असर
विरूर क्षेत्र में एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जो यहां के लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह है। लेकिन जब भी कोई गंभीर मरीज या गर्भवती महिला इलाज के लिए यहां आती है, तो उन्हें बेहतर सुविधाओं के अभाव में 30 किलोमीटर दूर राजुरा के ग्रामीण अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। लेकिन बदहाल सड़क के कारण यह सफर कई बार मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा अधिकारी प्रियंका पिंपळकर ने बताया कि हाल ही में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के चलते राजुरा रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उसने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की हालत गंभीर हो गई थी। यदि समय पर अस्पताल पहुंचने में थोड़ी भी देरी होती, तो मां और नवजात बच्चों की जान जा सकती थी। सड़क की दुर्दशा के कारण यहां शिक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। खराब सड़कें, परिवहन के साधनों की कमी और लंबी दूरी के चलते बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
गांववासियों का फूटा गुस्सा, विरुर क्षेत्र विकास समिति द्वारा विशाल धरण और चक्काजाम आंदोलन
ग्रामवासियों का कहना है कि वर्षों से वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सड़क मरम्मत की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है। स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब 11 गांवों के सरपंचों और सैकड़ों ग्रामीणों ने ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर विरुर क्षेत्र विकास समिति द्वारा विशाल धरण और चक्काजाम आंदोलन किया गया है। इस आंदोलन के तहत ग्रामीण राजुरा-विरूर मार्ग को जाम कर और प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया गया।
प्रशासन की ढुलमुल नीति, कब मिलेगी राहत?
ग्रामवासियों द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है। इस पर तहसीलदार गौंड का कहना है कि प्रस्ताव वरिष्ठ स्तर पर भेज दिया गया है और आदेश मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। वहीं, स्थानीय विधायक देवराव भोंगले ने विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाने का दावा किया और जल्द ही सड़क सुधार कार्य करने का आश्वासन दिया है।
कब जागेगा प्रशासन?
सरकारें ‘सबका विकास’ और ग्रामीण उत्थान की बड़ी-बड़ी बातें करती हैं, लेकिन विरूर के हालात देखकर साफ है कि यह केवल कागजी दावे हैं। यह क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, और अब तो लोगों की जान पर बन आई है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक सरकारें और प्रशासन लोगों की जिंदगी से यूं खिलवाड़ करते रहेंगे?
अब देखना होगा किआज का यह आंदोलन प्रशासन को नींद से जगाने में सफल होता है या नहीं!