चंद्रपुर शहर के बाबुपेठ प्रभाग में पानी की भारी किल्लत से लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ ही जल संकट और भी गंभीर हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के लिए जीवन दूभर हो गया है।
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नल में पानी का आना अब किसी चमत्कार से कम नहीं, वह भी अनियमित समय पर और नाममात्र की मात्रा में। इस समस्या से जूझ रहे नागरिकों ने प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
इस विकट स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रूपेश पांडे ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और तुरंत राहत देने की माँग की। इस दौरान उनके साथ अभिलाष दुबे, प्रफुल डफ, अभिनेश इम्मड़ी, विनोद नलें और राहुल शुक्ला समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
नागरिकों की पीड़ा: बाबुपेठ की संकरी गलियों में महिलाएँ और बच्चे घंटों पानी के इंतजार में बर्तन लिए बैठे रहते हैं, लेकिन पानी की एक बूंद भी आसानी से नसीब नहीं होती। कई इलाकों में हैंडपंप और बोरवेल भी सूख चुके हैं, जिससे हालात और बदतर हो गए हैं।
स्थानीय निवासी प्रशासन से सवाल कर रहे हैं—
“क्या हमें पीने के पानी के लिए भी आंदोलन करना पड़ेगा?”
“हमारे बच्चों को प्यासा मारने की साजिश क्यों?”
प्रशासन की लापरवाही!
गौरतलब है कि चंद्रपुर नगर निगम ने जल आपूर्ति को लेकर कई बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लोग टैंकरों के सहारे जीने को मजबूर हैं, और कई बार पानी के लिए झगड़े तक हो चुके हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द जल आपूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। वहीं, आम नागरिकों में भी भारी रोष है, और वे सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।
प्रशासन अब तक चुप्पी साधे बैठा है। क्या कोई समाधान निकलेगा, या फिर बाबुपेठ की जनता को इसी हाल में जीने के लिए मजबूर किया जाएगा?