कल दिखेगा दीप्ति का दमखम या शारदा की शक्ति ?
घुग्घुस वासियों को कल अर्थात शनिवार, 20 दिसंबर के मतदान के दिन का बेसब्री से इंतजार है। क्योंकि यह घुग्घुस नगर परिषद का पहला चुनाव हैं। नगरसेवकों के अलावा इस समय नगराध्यक्ष पद के उम्मीदवार को भी करीब 32 हजार मतदाता चुनेंगे। प्रथम नगराध्यक्ष पद का ताज किसके सिर सजेगा, यह कल होने वाले मतदात से स्पष्ट हो जाएगा। इस दौरान कांग्रेस की प्रत्याशी दीप्ति सोनटक्के का दमखम मतदाताओं के बीच चलेगा या भाजपा प्रत्याशी शारदा दुर्गम की शक्ति कमाल दिखाएगी, यह तय कर पाना मुश्किल है।
घुग्घुस शहर के करीब 32 हजार वोटर जब अपने मताधिकार का इस्तेमाल कल करेंगे, तब एक नया इतिहास लिखा जाएगा। वोटों की यह जंग प्रथम नगराध्यक्ष पद का सरताज का फैसला करेगी। सभी प्रत्याशियों के अलावा नगराध्यक्ष पद का भविष्य भी EVM में कैद होगा। बीते एक माह से सभी राजनीतिक दलों अपनी पूरी ताकत इस चुनाव के लिए झोंक रहे हैं। अनेक प्रमुख नेताओं ने तो घुग्घुस में डेरा डाला हुआ है। भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार, विधायक देवराव भोंगले यहां सक्रिय हैं। मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज अहिर आदि ने यहां भेंट दी। दूसरी ओर कांग्रेस की सांसद प्रतीभा धानोरकर एवं विधायक विजय वडेट्टीवार के अलावा प्रवीण पडवेकर, नंदू नागरकर, के.के. सिंह जैसे अनेक नेताओं की यहां उपस्थिति इस चुनावी जंग को रोचक बना गई।
भाजपा व कांग्रेस के लिए औद्योगिक नगरी घुग्घुस नप का चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है।
घुग्घुस शहर में नगर परिषद के चुनाव अब अंतिम पड़ाव पर है। नगराध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को लेकर जनता में उत्सुकता है। सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार में हैं। कांग्रेस से दीप्ति सोनटक्के और भाजपा से शारदा दुर्गम चुनावी मैदान में संघर्ष कर रही हैं। अन्य प्रत्याशी रिता देशकर, नैना ढोके, आरती पाटिल एवं रंजीता आगदारी राजनीतिक गणित बिगड़ भी सकते हैं। लेकिन इसकी संभावना कम है।
बीते अनेक चुनावों में घुग्घुस वासियों का रुझान कांग्रेस के प्रति अधिक सकारात्मक रहा है। वर्ष 2015 में ग्रापं चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को हराया था। वहीं गत लोकसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार प्रतीभा धानोरकर को बड़ी जीत यहां से मिली। विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी रहे प्रवीण पड़वेकर को भी घुग्घुस ने बढ़त दी थी। घुग्घुस वासियों के रुझान बताते हैं कि कुछ वर्षों में कांग्रेस को दमदार बढ़त मिली है। इसलिए यहां कांग्रेस के लिए राह आसान नजर आती है। जबकि भाजपा भले ही बीते चुनावों में पिछड़ गई हो, लेकिन संगठनात्मक रूप से विधायक किशोर जोरगेवार के नेतृत्व में इसे नई ऊर्जा मिली है। क्योंकि भाजपा के नवनियुक्त शहराध्यक्ष संजय तिवारी के कंधों पर घुग्घुस की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद से यहां के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इसलिए भाजपा को कम आंकना गलत साबित हो सकता है।
नगराध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी शारदा दुर्गम ग्रापं की पूर्व सदस्य रही है। 2 बार उन्होंने भाजपा का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें एक दशक का अनुभव है। 12वीं उत्तीर्ण शैक्षणिक योग्यता, लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी पकड़ उनकी शक्ति है। वहीं नगराध्यक्ष पद की कांग्रेस प्रत्याशी दीप्ति सोनटक्के के लिए यह उनका पहला चुनावी संग्राम है। ग्रापं के पूर्व सदस्य देवराव सोनटक्के गुरुजी की वे बहू हैं। पिछले कुछ वर्षों से सामाजिक और राजनीति गतिविधियों में उनकी सक्रियता ने नेतृत्व के काबिल बना दिया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता B.A. है और पारिवारिक विरासत में मिले राजनीति पाठ के बल पर तथा वर्तमान सामाजिक सक्रियता के कारण उनकी मजबूत पकड़ दिखाई दे रही है।
